शतं विहाय भोक्तव्यं, सहस्रं स्नानमाचरेत्।
लक्षं विहाय दातव्यं, कोटिं त्यक्त्वा हरिं भजेत्॥
अर्थात् – सौ कार्य छोड़कर भोजन करना चाहिए, हजार कार्य छोड़कर स्नान करना चाहिए, लाख कार्य छोड़कर दान करना चाहिए और करोड़ कार्य छोड़कर भगवान का भजन करना चाहिए।
मंदिर निर्माण एवं सेवा कार्य हेतु सहयोग
श्री बालाजी धाम बड़ेरा में मंदिर निर्माण, भक्तों के ठहरने हेतु धर्मशाला एवं विश्राम स्थल के निर्माण, भंडारा, प्रसाद वितरण तथा अन्य धार्मिक एवं जनसेवा कार्य निरंतर संचालित किए जा रहे हैं। शास्त्रों में दान को महान पुण्य का साधन बताया गया है। आपके द्वारा श्रद्धा और प्रसन्न मन से किया गया प्रत्येक सहयोग धर्म, सेवा और लोककल्याण के कार्यों में समर्पित होगा। अतः आप सभी श्रद्धालुओं से विनम्र निवेदन है कि श्री बालाजी महाराज की कृपा प्राप्त करने हेतु अपनी सामर्थ्य अनुसार दान देकर इस पुण्य कार्य में सहभागी बनें।
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श्री बालाजी धाम बड़ेरा के सेवा, पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठानों एवं धाम विकास कार्यों में अपना सहयोग प्रदान करें।
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यदि आप भी आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और बालाजी महाराज की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो श्री बालाजी धाम बड़ेरा अवश्य पधारें और इस पावन धाम की दिव्यता का अनुभव करें।
॥ जय श्री बालाजी महाराज ॥
॥ जय बजरंगबली ॥